कौशल-जीवन -५
5 बात का बतंगड़ तो उस दिन हुआ जब अमर ने आगे पढ़ाई जारी रखने से मना करने लगा। विमला और सुरेश उसे समझा रहे थे कि आज के दौर में पढ़ना लिखना कितना ज़रूरी है , लेकिन अमर इस ज़िद पर अड़ा था कि पढ़ने लिखने का क्या फ़ायदा जब आगे जाकर अपना बिज़नेस ही संभालना है । लेकिन विमला के वात्सल्य के सामने झुकना पड़ा और वह इस शर्त पर पढ़ाई जारी रखने को तैयार हो गया कि वह शाम के बाद बिज़नेस संभालेगा। कालेज के पहले दिन जब उसकी जमकर रैकिंग हुई तो वह घर आकर फिर ज़िद करने लगा लेकिन दूसरे दिन अमर के साथ सुरेश भी कालेज गया और प्रिन्सिपल से मिलकर अमर के साथ हुई रैकिंग पर चर्चा की। रैकिंग लेने वाले छात्रों से माफ़ी मँगवाई गई। इसके बाद तो अमर की रुचि धीरे-धीरे फिर पढ़ाई की तरफ़ लगने लगा और वह शाम को दुकान जाने की बजाय दोस्तों के साथ घूमने चला जाता था। लेकिन घर के सख़्त नियमो के चलते आठ-नौ बजे तक लौट आता था। एक दिन अमर ने बताया कि वह दोस्तों के साथ नंदनवन जा रहा है, क्योंकि आज कालेज की छुट्टी है। थोड़ा ना-नुकूर के बाद विमला की समझाईश पर सुरेश इस शर्त पर राज़ी हो गया कि वह दिन डूबने से पहले शाम तक घर लौट आएगा। ज...