कौशल-जीवन -४
4 बच्चे कितना भी बड़े हो जायें वे माँ-बाप की नज़रो में बच्चे ही होते हैं। यही वजह है कि अमर के हाईस्कूल पहुँच जाने के बाद भी विमला और सुरेश उसे अकेले भेजने से हिचकिचाते थे । अमर उनके रोक-टोक से चिड़चिड़ा जाता था, और बोल पड़ता था कि वह बच्चा नहीं रहा। लेकिन उसकी कौन सुनता। खारुन में एनिकट में डूब मरने की घटना आये दिन होने लगी थी, लेकिन बच्चे कहाँ मानने वाले थे। वे प्रायः हर रविवार को नदी में नहाने चले ही जाते थे। थोड़ी भी देर होती तो विमला की चिंता बढ़ जाती, और सुरेश को विमला के जिद के चलते उन्हें लाने जाना हाई पड़ता । ऐसे ही एक दिन अमर और विजय के देर हो जाने पर सुरेश उन्हें लेने नदी तट पर पहुँचा तो यह देखकर हैरान रह गया कि विजय एक पेड़ के नीचे खड़ा किसी से बात कर रहा है, सुरेश को लाख चेष्टा के बाद भी कोई और दिखाई नहीं दिया तो वह थोड़ी नज़दीक पहुँच गया। तब भी कोई नहीं दिख रहा था , हाँ विजय की आवाज़ सुनाई दे रही थी लेकिन आवाज़ स्पष्ट नहीं था। सुरेश डर गया, और विजय को ज़ोर से आवाज़ दी तो वह चुपचाप चला आया। सुरेश ने जब उससे पूछा कि वह किससे बात कर रहा था तो उसने कोई उत्तर नहीं दिया। ह...